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Jack Ma Success Story in Hindi | जैक मा – अलीबाबा संस्थापक की प्रेरणादायक कहानी

Jack Ma Success Story in Hindi

दुनिया में कुछ लोग असफलता हाथ लगने पर निराश हो जाते हैं, कुछ लोग रास्ता बदल लेते हैं, कुछ लोग इसे अपना गलत भाग्य मान कर और किस्मत में ऐसा लिखा मान कर समय से और मुश्किलों से समझौता कर लेते हैं और ऐसे में से कुछ जुनूनी, मेहनती लोग ऐसे भी होते हैं जो अपना रास्ता खुद बनाने लगते हैं और सारे पूर्वानुमान को गलत साबित करते हुए सारी मुश्किलों का अपने बुलन्द हौसलों से मुकाबला करते हुए विजेता बन जाते हैं। Jack Ma Success Story in Hindi

Jack Ma Success Story in Hindi

दोस्तों आज हम बात करनेवाले हैं अलीबाबा ग्रुप के फाउंडर Jack Ma के बारे में, उनके चीन के एक छोटे से गाँव से निकल कर चीन की सबसे बड़ी कंपनी को स्थापित करने के सफ़र के बारे में|

 

यह एक ऐसे इंसान की कहानी है जिसने न जाने अपने जीवन में कितनी ही ठोकरें खाई और असफलताओं का मुँह देखा, फिर भी उसने कभी हार न मानी| जहाँ कभी वह एक टूर गाइड के रूप में सिर्फ महीने के सिर्फ 800 रूपए कमाया करता था,

वहीं व्यक्ति आज 130,000 करोड़ रूपये की सम्पति के साथ  चीन की सबसे अमीर शख्शियत बन चुका है| एक रंक से राजा बनने की ये कहानी किसी और की नहीं बल्कि  ई-कॉमर्स  कंपनी ‘अलीबाबा डॉट कॉम(Alibaba.com)’ के संस्थापक Jack Ma की है- Jack Ma Success Story in Hindi

(Childhood)

Jack Ma का जन्म चीन के एक बहुत छोटे-से गाँव में १० सितम्बर १९६४ में हुआ था । उन्होंने बचपन गरीबी का हर वो चेहरा देखा जिसकी कल्पना करना भी हमारे लिए मुश्किल है ।

Jack Ma जैक मा को बचपन से ही अंग्रेजी सीखने की इच्छा हो गयी थी ,इसलिए वो प्रतिदिन सुबह साइकिल से पास की होटल पर जाते थे जहा अक्सर विदेशी नागरिक ठहरते थे | जैक मा शुरवात में उनके साथ टूटी फूटी अंग्रेजी में बात करते थे क्योंकि चीन में चीनी मुख्य भाषा थी और अंग्रेजी सीखना जरुरी नही माना जाता था |

अब वो अपने खाली समय में विदेशी लोगो को मुफ्त में शहर का गाइड करते थे जिससे उनकी प्रेक्टिस भी होती थी और उनकी अंग्रेजी में भी सुधार होता गया | उन्होंने नौ सालो तक यही काम किया |

इन विदेशियों को गाइड करते करते एक विदेशी मित्र से उनकी गहरी मित्रता हो गयी , जो उन्हें पत्र लिखा करता था और उसी विदेशी मित्र ने उन्हें जैक नाम दिया क्योंकि चीनी में उनका नाम बोलना और लिखना बड़ा कठिन था | तब से उनको जैक के नाम से ही जाना जाता है | बाद में बड़े होने पर जब उन्होंने विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा दी तो तीन बार इस परीक्षा में फेल हो गये |

उसके बाद जैक ने हंजाऊ टीचर्स इंस्टिट्यूट में दाखिला लिया , जहा से 1988 में उन्होंने अंगरेजी  में स्नातक परीक्षा उतीर्ण की | स्कूल के दौरान जैक को  विद्यार्थी परिषद का अध्यक्ष चुना गया था |

व्यवसाय की शुरुआत (Career)

 

Jack Ma शुरुआती दिनों में नौकरी की तलाश में भटक रहे थे, पुलिस की नौकरी के लिए भी उन्होंने आवेदन किया था । पर उनकी शारीरिक क्षमता इस नौकरी के अनुरूप ना होने के कारण उन्हें वहां से भी निराशा ही हाथ लगी|

जैक मा जब अमेरिका गए तो उन्हें वहाँ इंटरनेट के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त हुई, हालाँकि उन्होंने इसके बारे में पहले से सुन रखा था, पर अब उन्हें इसको उपयोग करने का मौका मिला ।

उन्होंने इंटरनेट पर जो पहला शब्द टाइप किया वो था BEER (भालू) । उन्होंने पाया कि दुनिया के बहुत से देशों के भालुओं के बारे में उन्हें जानकारी मिल गई, पर चीन में पाए जानेवाली प्रजातियों के बारे में कोई जानकारी उस वक्त तक इंटरनेट पर मौजूद नहीं थी ।

फिर उन्होंने अलग-अलग चीजें चीन के बारे में सर्च की । पर इंटरनेट पर चीन के बारे में बहुत ही कम जानकारी उपलब्ध थी । जो उन्हें अच्छा नहीं लगा और उन्होंने अपने कुछ मित्रों की मदद से एक वेबसाइट बनाई जो चीन के बारे में जानकारियां देती थी ।

महज कुछ ही घंटो के अन्दर उन्हें बहुत से ईमेल प्राप्त हुए जो लोग Jack के बारे में जानना चाहते थे । अब तक Jack को इंटरनेट की अनंत संभावनाओं का एहसास हो चुका था । इस से पहले वो एक ट्रांसलेशन (अनुवाद) करनेवाली एक छोटी सी एजेंसी चलाते थे । अब जैक इंटरनेट की मदद से कुछ नया करना चाहते थे ।

 

सन १९९५ में जैक ने अपने कुछ मित्रों और पत्नी की मदद से २०,००० डॉलर जमा किये जिसमे उनकी अपनी बहन से लिए हुए पैसे भी शामिल थे और एक नई वेबसाइट बनाई जो चीन में जो छोटी-बड़ी कंपनियां थी उनको वेबसाइट बनाकर देती थी । इसका नाम उन्होंने “China Yellow Pages” रखा । वांछित लाभ ना मिलने के कारण यह व्यवसाय भी असफल हो गया ।

 

अलीबाबा कंपनी की शुरुआत ( Jack Ma Alibaba)

 

“चाइनापेज” की असफलता के बाद उन्होंने एक बिल्कुल ही नए विचार पर काम करने की सोची और वह विचार था – एक ऐसे वेबसाइट की स्थापना करना जो अलग-अलग व्यवसायों के बाजारों के लिए एक ख़ास पोर्टल प्रदान करे और जहाँ दुनिया के विभिन्न जगहों के निर्यातक अपने उत्पादों की एक विस्तृत सूची पेश कर सकें| जैक मा ने इस वेबसाइट का नाम “अलीबाबा” रखा|

Jack Ma Success Story in Hindi

पहले-पहले अलीबाबा में निवेश के लिए जैक मा ने सिलिकॉन वैली की ओर रुख किया, जहाँ उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगी| यहां तक की सिलिकॉन वैली में कईयों ने तो उनकी इस परियोजना को एक असफल और घाटेवाला बिज़नस मॉडल करार दिया|

पर उन्होंने अपने इस सपने को टूटने नहीं दिया और जल्दी ही वो वक्त भी आया जब दो बड़ी कंपनियों – गोल्डमैन सैक्स और सॉफ्टबैंक, ने अलीबाबा डॉट कॉम में कुल 25 मिलियन डॉलर का निवेश किया|

इतने पर भी अलीबाबा से कोई लाभ न होता देख जैक मा और उनकी टीम ने 2003 में ‘ताओबाओ डॉट कॉम’ नाम से एक ऑक्शन वेबसाइट (नीलामी की वेबसाइट) बनाई, जिस पर सामानों की नीलामी निःशुल्क थी| इस वेबसाइट का निर्माण सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी ईबे (eBay) को पछाड़ने के लिए किया गया था, जिसका पहले से ही चीन के नीलामी बाजार के बड़े हिस्से पर प्रभुत्व था| ताओबाओ पर निःशुल्क सेवा प्रदान करने की वजह से अलीबाबा पर बहुत अधिक आर्थिक दबाव बनने लगा। इस दबाव को कम करने के लिए मा और उसकी टीम कई अतिरिक्त वैल्यू-एडेड सेवाएँ उपलब्ध कराने लगी, जैसे कस्टम वेबपेजेज| पाँच वर्षों में ही ईबे को चीन के बाजार से अपने कदम पीछे खीचने पड़े|

खुद से कहीं ज्यादा बड़े प्रतिद्वंदी से भिड़ने में तो जैसे “जैक मा” को एक अलग ही आनंद प्राप्त होता था| ईबे से अपनी इस लड़ाई के बारे में जैक मा कहते हैं,

अगर ईबे (e Bay)समंदर का शार्क हैतो हम (अलीबाबा और ताओबाओ) यांग्त्ज़ी नदी के मगरमच्छ हैं

 

इसके बाद इस कंपनी ने कई उतार-चढ़ाव देखा| एक समय तो ऐसा भी आया जब यह कंपनी दिवालिया बनने से केवल 18 महीने ही दूर थी| पर जैक मा के दृढ़संकल्प, दूरदर्शिता और बेमिशाल नेतृत्व की बदौलत अलीबाबा.कॉम (Alibaba) न सिर्फ उस संकट से उबर पाई, बल्कि बहुत ही जल्द सफलता के नए शिखर पर पहुँच गयी|

2013 में 10 लाख करोड़ रूपये के आईपीओ साथ यूएस मार्किट में सबसे बड़ी आईपीओ वाली कंपनी बनकर उभरी है| खुद जैक मा की संपत्ति 23 बिलियन डॉलर से भी अधिक आँकी गई है|

 

लीबाबा कंपनी की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि इस कंपनी ने अपना Initial Public Offering (IPO) 4080 रुपए (68 डॉलर) पर पेश किया था और मार्केट खत्म होने पर इसकी कीमत 5711 रुपए (93.89 डॉलर) हो गई थी। इसे अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बताया जा रहा है। उनकी निजी संपत्ति की कीमत करीब 130800 करोड़ रुपए है।

Alibaba.com के नाम से मशहूर यह कंपनी दुनिया भर के 190 कंपनियों से जुड़ी हुई है। Alibaba.com वेबसाइट के अलावा taobao.com चलाती है जो चीन की सबसे बड़ी शॉपिंग वेबसाइट है। इसके अलावे चीन की बड़ी जनसंख्या को इनकी वेबसाइट tmall.com ब्रांडेड चीजें मुहैया कराती हैं।

 

यही नहीं, चीन में ट्विटर जैसी सोशल मीडिया सिना वाइबो में भी इस कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी है, इसके साथ ही YouTube जैसी वीडियो शेयरिंग वेबसाइट Youku Tudou में भी अलीबाबा की अहम हिस्सेदारी है। ये कंपनियां मार्केटिंग, cloud computing और लोजिस्ट सेवाएं देती हैं। अलीबाबा कंपनी के शुरुआती दिनों में सिर्फ 18 लोग काम करते थे और अभी करीब 22 हजार लोग काम करते हैं।

 

हम सफल हो कर रहेंगे क्योंकि हम कभी भी हार नहीं मानते

उपलब्धियाँ और सम्मान

  • 2004 में China Central Television द्वारा “Top 10 Business Leaders of the Year” चुने गए।
  • 2005 में World Economic Forum ने “Young Global Leader” सम्मान से नवाजा। उसी वर्ष Fortune Magazine ने “25 Most Powerful Business People in Asia” में से एक चुना।
  • 2008 में Barrons ने “One of the Best 30 World’s Best CEO” चुना।
  • 2009 में Forbes Magazine ने “Top 10 Most Respected Entrepreneurs in China” चुना।
  • 2013 में Hong Kong University of Science and Technology ने मानद doctoral डिग्री से नवाज़ा
  • 2014 में Forbes ने “30th Most Powerful Person in the World” में से एक चुना।
  • 2015 में The Asian Awards  ने Entrepreneur of the Year award से नवाज़ा
  • जापान के Soft bank के Board Member हैं।

 

अगर आपके अंदर दृढ विश्वास है, आपको अपने काम से लगाव है तथा अपने ऊपर भरोसा है तो कोई भी समस्या, कोई भी मुश्किल आपका रास्ता नहीं रोक सकती। आप सफल होंगे ही, इसलिए असफलताओ से डरे नहीं बल्कि डटकर उनका मुकाबला करें।

 

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